प्रिय ! बलिहारी लीला सदगुरु की

मित्रों ! कल बाबा बोल रहे थे …साधक शान्त भाव से सुन रहे थे …प्रातः के 6 बजे हैं …मोगरा और वेला इनकी खुशबु से पूरा कुञ्ज महक़ रहा था …सब साधकों के नेत्र बन्द थे …और अपने अपने इष्ट का हृदय में ध्यान करते हुये कर्णरंध्रों से बाबा की वाणी को पी रहे थे ।

  • भक्त हृदय का कभी तिरस्कार मत करो …उसके हृदय से जब हाय निकलती है तो तुम्हें भगवान भी नही बचा सकता …वो व्यक्ति भगवत् द्रोही हो जाता है …क्यों कि उसने भगवान के प्यारे भक्त का अपराध किया है ।

तुम से अगर भक्त का अपराध हो गया तो तुम्हारी सारी साधनायें भस्मी भूत हो जाएँगी …तुम नष्ट हो जाओगे …इसलिए भक्तों का …गरीबों का …साधुओं का …वृद्ध और बालकों और स्त्री का कभी भी अपमान मत करो …ये साधकों के लिए चेतावनी है ।

मेरे यहाँ कुछ लोग आये हैं …मैं थोड़ा इधर व्यस्त था …शाम को गौरांगी का फोन आया …हरि जी ! आप आ सकते हो क्या ? बेचारी घबराई हुई थी …।

मैंने कहा …गौरांगी तुम कहाँ हो ?…पुलिस थाने में …मैंने चौंक कर पूछा क्या हुआ ? आप आइये पहले ।
मैं तुरन्त गया …गौरांगी पुलिस वाले से बातें कर रही थी …आप अभी चलिये …मेरे साथ चलिये …वृन्दावन में साधु सन्त सुरक्षित नही है …आप की यही कानून व्यवस्था है ? …मेरे कुछ समझ में नही आया था…पुलिस वाले ने कहा – मैडम आप जाइये हम लोग आरहे हैं …। गौरांगी का चेहरा लाल हो गया था …उसे क्रोध भी आरहा था …और कुछ दयनीय सी भी लग रही थी ।

मेरे साथ गाड़ी में बैठी गौरांगी …मैंने गाड़ी चलाते हुये पूछा क्या हुआ ? सब ठीक तो है ना ?…रो गयी गौरांगी …हरि जी ! आज दोपहर कुञ्ज में दो बदमाश आये …पता नही उन्हें क्या लगा होगा …कि बाबा के पास पैसा या माल है …बाबा तो ध्यान में बैठे हुये थे …मैं बाहर कुञ्ज में बैठी माला जप रही थी …कुञ्ज में कोई नही था …एक बदमाश सीधे बाबा की कुटिया के भीतर घुस गया …और बाबा को चिल्लाकर बोला …माल निकालो …मैं जब भीतर जाने लगी तो एक लड़के ने मुझे भीतर जाने नही दिया …मैं चिल्लाई …और बोली …हम लोगों के पास कुछ नही है ..बाबा ध्यान में हैं…उन्हें छूना भी नही…बर्बाद हो जाओगे ! …जब उन्होंने देखा कि बाबा ऐसे नही देगा …तो ध्यान में बैठे बाबा के देह में लाठी मारने लगे …बाबा ने आँखें खोल कर देखा …और गम्भीरता से बोले …यहाँ कुछ नही है । और दो तीन लाठी मारकर वो लोग भाग गये …बाबा उन्हें जानते हैं …यहीं पास में ही वो लोग रहते हैं …एक दो बार और शराब पी कर कुञ्ज में उनलोगों ने ही उपद्रव मचाया था …। मैं दौड़ी दौड़ी भीतर बाबा की कुटिया में गयी …तो मैंने देखा …बाबा मुस्कुरा रहे थे …और बाबा बोले …बेचारे चले गये …उन्हें यहाँ कुछ नही मिला । मैंने कहा …बाबा आपके कहाँ लगी है ? …बाबा बोले …अरे ! कुछ नही थोड़ा ही मारे हैं …वो चाहते तो जान से भी मार सकते थे …पर नही मारा …। बाबा आप उन्हें जानते हो ?…हाँ जानता हूँ …पर उनकी गलती नही है …गलती शराब के सेवन की है …गलत संग की है …रजोगुण और तमोगुण के कारण ये सब वह कर रहे हैं ।
हरि जी ! मेरी समझ में नही आया कि मैं क्या करूँ ? …मैं पुलिस चौकी में आगई…बताना जरूरी था …।

हम कुञ्ज में गये …बाबा बैठे थे …शान्त भाव से …कहाँ गये थे तुम लोग ? …बाबा ने पूछा । पुलिस चौकी …बाबा चौंक कर बोले …क्यों गये थे ? …। देखो ! मुझे चोट कहाँ लगी है ? …वो लोग चाहते तो मेरे सिर में भी लाठी मार सकते थे …और मेरा शरीर छूट जाता …। हम लोग बात कर ही रहे थे कि पुलिस आगई …

बाबा किसने मारा है आपको …? बाबा ने हँसते हुये कहा …मेरे “कर्म” ने मारा है मुझे …पुलिस ने मेरी ओर देखा …मैंने बाबा से कहा …बाबा आप उन लोगों को जानते हैं …बता दीजिये ना …पुलिस ने फिर पूछा आप डरें नही बताईये किसने आपको मारा है ? …बाबा हँसे …और बोले …मैं क्यों डरूंगा …मुझे भैया मेरे बुरे कर्मों ने मारा है …आप लोग जाएँ यहाँ से , मेरी साधना में आप विघ्न न डालें । पुलिस वाले बाहर आये …और आकर गौरांगी से बोले …मैडम ! अगर फिर ऐसी घटना हो तो आप स्वयं संज्ञान में लीजियेगा …और ये मेरा no. है …इसमें सूचना दे दीजियेगा ।

रात्रि में पास की ही एक महिला आयी …रात्रि के 9 बज रहे थे …गौरांगी कुञ्ज में ही थी …और अपनी कुटिया में जाने ही वाली थी कि …उस महिला ने आकर रोना शुरू किया …गौरांगी ने कहा …क्या हुआ मैया ! क्यों रो रही हो ? …बिटिया …मेरा बेटा , पता नही उसे क्या हो गया है …वो पागल सी हरकत कर रहा है …और चिल्लाचिल्लाकर बोल रहा है …”मैंने बाबा को लाठी मारी है” …मैंने …मैं गया था बाबा के यहाँ चोरी करने …फिर हँसता है …और कहता है …उनके यहाँ तो कुछ भी नही था …फिर रोने लग जाता है …कि मैंने ऐसा क्यों किया ! मुझ से पाप हो गया… मेरा शरीर जल रहा है …मुझे बचाओ ।

बाबा आवाज़ सुनकर भीतर से बोले…गौरांगी ! कौन है ? कौन आया है ?…कोई महिला रो रही है…उससे पूछो क्यों रो रही है ?
वो महिला भीतर गयी …और बाबा के चरण पकड़ लिए …बाबा मेरे बच्चे को बचा लो …उससे बहुत बड़ा अपराध बन गया है …बाबा आप तो दयालु हो …मेरा बेटा पागल हो गया है ।
गौरांगी ने कहा …बाबा कुछ नही कर सकते …आप जाएँ …और अगर ज्यादा ही तबियत खराब हो रही है आपके बेटे की तो हॉस्पिटल ले जाएँ …पर यहाँ न आइये …ये साधना स्थली है ।

बाबा ! आप कृपा करिये …कोई डॉक्टर उसे नही बचा सकता …आप ही देख लीजिये …बाबा । गौरांगी ने कहा …भगवत् रूप बाबा को लाठियों से मारा है उसने …उसे दण्ड तो मिलना ही था । …ऐसा मत बोल बेटी …।

बाबा आप कृपा करो …बाबा ने गौरांगी से कहा …चल …।
कहाँ ? …गौरांगी ने चौंक कर पूछा …इसके घर में ।
पर क्यों ? …कोई बात नही …गलती सबसे होती है …इससे भी हुई …चल । नही बाबा ! मैं तो जाऊँगी ही नही …आपको भी नही जाने दूँगी …। बाबा ने कहा …हम लोग “प्रेम साधना” के साधक हैं ना…अगर क्षमा करना हमने नही सीखा …तो काहे का ये ढोंग कर रहे हैं…हमारे जीवन में “क्षमा” का प्राकट्य नही हुआ …तो काहे की साधना करते हो तुम लोग ।

देखो ! क्षमा करना ही हम साधकों का कार्य है …भारी से भारी गलती भी हम लोगों को क्षमा से दूर कर देनी चाहिए ।
गौरांगी ! मन में किसी के प्रति भी द्वेष बुद्धि मत रखो …इससे तुम्हारा हृदय जलेगा …और हृदय के जलते ही …भगवत् प्रेम का जो आनंद तुम ले रही हो …वो ख़तम हो जाएगा । फिर तुम में और एक संसारी में क्या भेद रहा ?…अरे ! हम साधक हैं …इस बात की मन में ठसक रखो…और विशालता हृदय में रखते हुये उस बात को क्षमा करके निकाल दो …गौरांगी ! हम यहाँ जो श्री धाम में बैठकर साधना कर रहे हैं …क्या अब द्वेष मन में रखकर साधना को मिटियामेट करना चाहती हो ? …गौरांगी ! बिच्छु का काम है ..डंक मारना …पर साधक का काम है …बस क्षमा करते रहना…देखो …ऐसा करके देखो ..तुम्हारे हृदय में चमत्कार होगा…तुम्हारा हृदय प्रेमपूर्ण हो जायेगा ।

गौरांगी चुपचाप सिर झुकाये सुनती रही …और उसके नयनों से अश्रु बहते रहे …बाबा जैसे सदगुरु का मिलना …इस युग में बहुत बड़ी बात है ।

बाबा चले …गौरांगी पीछे पीछे चली …पास में ही घर है …बाबा जैसे ही घर में गये …वह लड़का अपने कमरे में भागा …और भीतर से कुण्डी लगा दी ।
बाबा ने बड़े प्रेम से दरवाजा खटखटाया …और बाबा बोले …लाला ! दरवाजा खोल …आप मुझे मारोगे ? …बाबा बोले नही पगले ! मैं तो तुझे प्रेम देने आया हूँ …मैं तुझ से प्रेम करता हूँ …आ ! दरवाजा खोल…बाबा की बात सुनकर उसने दरवाजा खोला …और दरवाजा खोलते ही वो जैसे ही बाहर भागने लगा …बाबा ने भाग कर उसे पकड़ लिया …और कसकर उसे गले से लगा लिया…वो थोड़ा छटपटाया …पर बाबा ने उसे अपने प्रेम के पाश में बांध लिया था…उसके नेत्रों से अब अश्रु बहने लगे …वो फूट फूट के रो पड़ा …। बाबा ने उसके माथे को चूमा …और बड़े प्यार से उसे छोड़ा …।
वो लड़का …अब बाबा के चरणों में था …साष्टांग । बाबा ने कहा …सत्संग में नही आते ? …वो बस रोये जा रहा था ..उसका हृदय उसे कचोट रहा था…बाबा ने कहा …हट्ट पगले ! तेरा मेरा कोई पूर्व जन्म का हिसाब था…आज बराबर हो गया ।

बाबा आपने मुझे क्षमा कर दिया ? …बाबा ने हँसते हुये कहा …अभी नही किया …कल से सत्संग में आएगा ? …आऊँगा …बाबा बोले …कल से सत्संग में आएगा ना …तो मैं तुझे क्षमा कर दूँगा …। आऊँगा बाबा अवश्य आऊँगा । बाबा ने उसके सिर में हाथ फेरा और बाबा चल दिए अपने कुञ्ज की ओर ।

गौरांगी ने ये बात मुझे रात्रि में फोन पर बताया था । …और वो बता रही थी …तो वह भी रो रही थी …और सुनकर मैं भी ।

ऐसे हैं हमारे सद्गुरूदेव पागलबाबा ।

“तुम्हें और क्या दूँ इस दिल के सिवाय,
तुम को हमारी उमर लग जाये”

Harisharan

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